कलत्र
कैसे पढ़ें
- विवाह और एक-एक का साथ
- ग्राहक, व्यापार और खुली मुलाकात
- किसी भी समझौते में दूसरा व्यक्ति
- निर्भरता और टकराव पर सावधानी
कलत्र भाव मेज़ के पार बैठे व्यक्ति का भाव है। शुक्र विवाह और बराबरी से मिलने की इच्छा के कारक हैं। विवाह का फल सप्तमेश और शेष कुंडली से भी देखा जाता है। यह पृष्ठ केवल भाव का नाम रखता है। सप्तमेश काल-विधि में मारक है। यह आयु की विधि है, जीवनसाथी पर निर्णय नहीं।
जन्म कुंडली में यह भाव लग्न से गिना जाता है। आज के राशिफल में “चंद्र सप्तम भाव में” उस राशि से सातवाँ चंद्र है। यह जन्म का सप्तम भाव नहीं है।
प्रथम भाव द्वितीय भाव तृतीय भाव चतुर्थ भाव पंचम भाव षष्ठ भाव सप्तम भाव अष्टम भाव नवम भाव दशम भाव एकादश भाव द्वादश भाव
प्रश्न
सप्तम भाव
सप्तम भाव क्या है?
जीवनसाथी, व्यापार का साझेदार, और जनता से व्यवहार। यह दूसरे व्यक्ति का भाव है।
क्या अकेले सप्तम भाव से विवाह तय होता है?
नहीं। विवाह सप्तमेश, शुक्र और शेष कुंडली से भी पढ़ा जाता है। यह पृष्ठ भाव बताता है।
सप्तम भाव का कारक कौन है?
विवाह का प्राकृतिक कारक शुक्र है। सप्तमेश इस भाव की राशि का स्वामी है।