रिपु
कैसे पढ़ें
- लंबित काम और दिनचर्या
- ऋण, रोग और खुली स्पर्धा
- जो बाधा प्रयास से सुधरती है
- कार्यस्थल की आलोचना पर सावधानी
रिपु भाव वह है जिससे निपटना पड़ता है: सेवा, प्रतिद्वंद्वी, ऋण और शरीर की शिकायत। मंगल संघर्ष और काम पूरा करने की इच्छा के कारक हैं। दीर्घ रोग और सेवक के लिए शनि भी पढ़े जाते हैं। षष्ठ दुःस्थान भी है और उपचय भी, इसलिए लगातार काम बाधा को कौशल में बदल सकता है।
जन्म कुंडली में यह भाव लग्न से गिना जाता है। आज के राशिफल में “चंद्र षष्ठ भाव में” उस राशि से छठा चंद्र है। यह जन्म का षष्ठ भाव नहीं है।
प्रथम भाव द्वितीय भाव तृतीय भाव चतुर्थ भाव पंचम भाव षष्ठ भाव सप्तम भाव अष्टम भाव नवम भाव दशम भाव एकादश भाव द्वादश भाव
प्रश्न
षष्ठ भाव
षष्ठ भाव का अर्थ क्या है?
शत्रु, रोग, ऋण, सेवा और समस्याओं को सुलझाने का दैनिक काम।
क्या षष्ठ भाव केवल कठिन है?
यह दुःस्थान है, इसलिए संघर्ष दिखाता है। यह उपचय भी है, इसलिए प्रयास उस संघर्ष को कौशल बना सकता है।
षष्ठ में रोग का कारक कौन है?
शत्रु का प्राकृतिक कारक मंगल है। दीर्घ रोग और सेवा के लिए शनि पढ़े जाते हैं। षष्ठेश बताता है कि यह भाव एक कुंडली में कैसे काम करता है।