पुत्र
कैसे पढ़ें
- संतान और रचना की शक्ति
- अध्ययन, मंत्र और स्पष्ट बुद्धि
- प्रस्तुति और रचनात्मक कार्य
- सट्टेबाजी और नाटक पर सावधानी
पुत्र भाव वह है जो कुंडली अपनी बुद्धि से उत्पन्न करती है। गुरु अध्ययन, संतान और आगे बढ़ने वाले आशीर्वाद का साथ देते हैं। त्रिकोण सहारे का भाव है, इसलिए शास्त्र में यह पूर्व पुण्य का स्थान है। सट्टा भी यहीं है, इसलिए राशिफल सावधानी तब इसका नाम लेती है जब चंद्र किसी राशि से पंचम में हो।
जन्म कुंडली में यह भाव लग्न से गिना जाता है। आज के राशिफल में “चंद्र पंचम भाव में” उस राशि से पाँचवाँ चंद्र है। यह जन्म का पंचम भाव नहीं है।
प्रथम भाव द्वितीय भाव तृतीय भाव चतुर्थ भाव पंचम भाव षष्ठ भाव सप्तम भाव अष्टम भाव नवम भाव दशम भाव एकादश भाव द्वादश भाव
प्रश्न
पंचम भाव
पंचम भाव क्या है?
संतान, बुद्धि, अध्ययन, मंत्र, प्रेम और रचनात्मक कार्य।
पंचम भाव त्रिकोण क्यों है?
प्रथम, पंचम और नवम त्रिकोण हैं, सहारे के भाव। पंचम पूर्व पुण्य और अपनी रचना का भाव है।
पंचम भाव का कारक कौन है?
संतान और विद्या का प्राकृतिक कारक गुरु है। पंचमेश इस भाव की राशि का स्वामी है।